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摘要
वेद प्रकाश गुप्ता एक व्यंगात्मक मूर्तिकार है जिन्होंने समाज में होर हे असमानताकोर्तिशिल्पकेद ्वारा दिखाने कीकोशिशकी है। वेद प्रकाशगुप्ता के मूर्तियों का अगर विस्तृत विश्लेषण किया जाए तो यह ज्ञात होता हैकी उन्होंने अपने मूर्तिशिल्पो में एक प्करार से सामाजिक कटाक्ष का भावप्रस्तुत किया है। उनके रंगीन फाइबर ग्लास के मूर्तिशिल् को किसी प्रकार स अतेिशयोक्ति पूर्ण नहींकाह जासकता। उन्होंने अपने मूर्तिशिल् पमेंसमकालीन भारत के संघर्ष और भ्रष्ट आचरण करने वलाे मनुष्य औरगल्ोबाइजेशन के प्रति एक तीव्र भावना व्यक्त की है। जो वक्तिगत अनुभव पर आधार्त है।
वेद प्रकाश गुप्ता के मुर्ति शिल्प में रंगो का प्रयोग
वेद प्रकाश गुप्ता एक व्यंगात्मक मूर्तिकार है जिन्होंने समाज में हो रहे असमानता को मूर्तिशिल्प के द्वारा दिखाने की कोशिश की है। वेद प्रकाश गुप्ता के मूर्तियों का अगर विस्तृत विश्लेषण किया जाए तो यह ज्ञात होता है की उन्होंने अपने मूर्तिशिल्पो में एक प्रकार से सामाजिक कटाक्ष का भाव प्रस्तुत किया है। उनके रंगीन फाइबर ग्लास के मूर्तिशिल्प को किसी प्रकार से अतिशयोक्ति पूर्ण नहीं कहा जा सकता। उन्होंने अपने मूर्तिशिल्प में समकालीन भारत के संघर्ष और भ्रष्ट आचरण करने वाले मनुष्य और ग्लोबलाइजेशन के प्रति एक तीव्र भावना व्यक्त की है। जो वक्तिगत अनुभव पर आधारित है।